“रामनवमी पर विशेष “प्राण जाये पर वचन ना जाये”

“रामनवमी पर विशेष “प्राण जाये पर वचन ना जाये”

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रामनवमी पर विशेष “प्राण जाये पर वचन ना जाये, History of ram navami in hindi

जब-जब धर्म की हानि होती है ,और अधर्म का नाश होता ,और कभी -कभी समाज जो प्रेरणा देने के लिये परमात्मा स्वयं धरती पर अवतरित होते हैं। और अपनी लीलाओं द्वारा समाज को प्रेरक सन्देश देते हैं ।  चाहते तो श्री राम अपने पिता के महल में सुख सुविधाओं से पूर्ण ऐश्वर्य का जीवन जी सकते थे ,परन्तु उन्होंने तो समाज के उत्थान के और रावण जैसे अहंकार से धरती को पाप मुक्त करने के लिये अवतार लिया था।

श्री राम ,लक्ष्मण ,जानकी भरत, शत्रुघ्न इन सबका जीवन एक मिसाल बन गया ,घोर कष्ट सहने के बावजूत भी इन्होंने अपनी मर्यादाओं का उलंघन नहीं किया ।

*मर्यादा पुरुषोत्तम  “श्री रामचन्द्र भगवान *

पुरुषों में सबसे उत्तम , मर्यादा जिसकी पहचान

सूर्य वंश में जन्मे ,नवमी तिथि ,मंगल बेला ,अयोध्या नगरी राजा  दशरथ के यहाँ चार पुत्रों ने जन्म लिया ।

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सब और मंगल ही मंगल होने लगा ,वृक्षो पर फल -फूल खिल गये ,पक्षी विहार करने लगे ,रिद्धि -सिद्धियाँ  सब और समृद्धि छाने लगी । सब हर्षित मंगल गीत गुनगुनाने लगे ।राजा दशरथ ,और उनकी चारों रानियाँ धन्य-धन्य हो गयीं ।माता कौशल्या का सुभाग्य कि स्वयं परमात्मा सृष्टि के पालक नन्हें शिशु बनकर उनकी गोद में खेले ।

धन्य -धन्य था ,वह युग वह काल , सतयुग का युग जब परमात्मा ने धरती पर अवतार लिया ।

चाहते तो श्री राम चौदह साल के लिऐ वनवास न जाते ,परन्तु वो थे मर्यादा पुरुष अपनी माँ के कहे हुए वचनों को टालना उन्हें उचित नहीं लगा ।

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श्री राम ने एक पत्नी व्रत का पालन किया ,

एक धोबी के कहने पर उन्होंने समाज की मर्यादा के लिये अपनी  पवित्र पतिव्रता नारी का त्याग किया ।

श्री राम का चरित्र इस बात का पर्याय है ,कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति आये ,लेकिन अपने समाज को और आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिये अपनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिये ।

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