Narak Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi: नरक चतुर्दशी कथा और पूजा विधि

Narak Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi: नरक चतुर्दशी कथा और पूजा विधि

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Narak Chaturdashi

Narak Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi: कार्तिक माह हिन्दु धर्म के सबसे पवित्र महिना माना जाता है। इस महीने हिन्दू धर्म के अनेक पर्व मनाया जाता है। कार्तिक माह में पांच दिन लगातार पर्व मनाया जाता है। दिवाली से ठीक एक दिन पहले यानी इस बार 18 october को नरक चतुर्दशी मनाया जायेगा है। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली के रूप भी मनाया जाता है।

नरक चतुर्दशी 2017: Narak Chaturdashi in Hindi

कार्तिक महीने के विक्रम संवत में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन को यम चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और Kali Chaudas भी कहा जाता है।

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शास्त्रों के अनुसार कहा गया है की इस दिन को यमराज की पूजा और उनके लिए  व्रत रखने का प्रावधान है। ऐसा कहा जाता है कि पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म इसी शुभ दिन को हुआ था। इसीलिए आज हनुमान जी की भी विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है।

क्यों नरक चतुर्दशी मानते है- Why celebrate Narak Chaturdashi in Hindi?

हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि नरक चतुर्दशी के दिन आलस्य और बुराई को मारकर आपकी जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का समावेश होता है। आज ही के दिन रात को घर चौखट के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न  होते हैं और अकाल मृत्यु की संभावना को ख़त्म कर देते है। ऐसा करने से अचानक आने वाली बढ़ाये हमेश के लिए टल जाती है।

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एक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था.

नरक चतुर्दशी को इस मंत्र का जाप करें Narak Chaturdashi Mantra in Hindi

“सितालोष्ठसमायुक्तं संकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।“

पूजा करने की विधि: Narak Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi

– नरक चतुर्दशी के दिन अपने शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें।

– सूर्योदय से पहले अवश्य स्नान करें।

– स्नान के दौरान अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) को शरीर पर स्पर्श करें।

– अपामार्ग को निम्न मंत्र पढ़कर मस्तक पर घुमाए।

– नहाने के बाद साफ या नये कपड़े धारण करे।

– तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाए।

– निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए।


“ऊं यमाय नम:, ऊं धर्मराजाय नम:, ऊं मृत्यवे नम:, ऊं अन्तकाय नम:, ऊं वैवस्वताय नम:, ऊं कालाय नम:, ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊं औदुम्बराय नम:, ऊं दध्राय नम:, ऊं नीलाय नम:, ऊं परमेष्ठिने नम:, ऊं वृकोदराय नम:, ऊं चित्राय नम:, ऊं चित्रगुप्ताय नम:”

नरक चतुर्दशी के दिन दिये जलाकर घर के बाहर रखने से आपकी सारे कष्ट दूर हो जाता है। ऐसी धारणा है कि दिये की रोशनी से प‌ितरों को अपने लोक जाने का रास्ता दिखाई देता है। ऐसा करने से पित्र प्रसन्न होते हैं और आपक पित्र अगर प्रसन्न है तो आपसे देवता और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। दीप दान करने से संतान सुख में आने वाली बाधा से मुक्ति मिलती है। ऐसा करने से वंश की वृद्ध‌ि होती है।