मेधा पाटकर का जीवन परिचय, Social Activist Medha Patkar Biography in Hindi

मेधा पाटकर का जीवन परिचय, Social Activist Medha Patkar Biography in Hindi

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Medha Patkar in Hindi

Social Activist Medha Patkar Biography in Hindi: मेधा पाटकर का जन्म 1-Dec-1954 को मुंबई (महाराष्‍ट्र) हुआ था। वे एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता (Social Activist) तथा सामाज सुधारक है। वे भारतीय राजनीतिज्ञ भी है। मेधा पाटकर (Medha Patkar) के माता-पिता एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनके पिता भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम में भाग ले चुके थे, जबकि माता महिलाओं की सहायतार्थ कार्य करने वाली सामाजिक संस्‍था की सदस्‍य थीं। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर (Social Activist Medha Patkar) मुंबई से आम आदमी पार्टी से चुनाव भी लड़ चुकी है, लेकिन उनका अधिकतर जीवन एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर गुजरा है। मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन (Medha Patkar Narmada Bachao Andolan) की संस्थापक के नाम से भी जानी जाती है।

Social Activist Medha Patkar Qualification:-

मेधा पाटकर ने टाटा इंस्‍टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस (Tata Institute of Social Sciences) से सोशल वर्क में एमए की डिग्री प्राप्‍त की और मुंबई में बसी झुग्गियों में बसे लोगों की सेवा करने वाली संस्‍थाओं से जुड़ गईं।

मेधा पाटकर का नर्मदा बचाओ आन्दोलन Medha Patkar Narmada Bachao Andolan:

28 मार्च 2006 को उन्‍होंने नर्मदा नदी के बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के आन्दोलन किया और भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया, 17 अप्रैल 2006 को सुप्रीम कोर्ट से नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) के तहत बांध पर निर्माण कार्य रोक देने की अपील को खारिज कर दिया। नर्मदा बचाओ आंदोलन के अलावा भी मेधा कई सामाजिक और पर्यावरण संबंधी आंदोलनों में भागीदारी कर चुकी हैं। अन्‍ना हजारे के भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन में मेधा ने टीम अन्‍ना का समर्थन किया।  मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन (Medha Patkar Narmada Bachao Andolan) की संस्थापक के नाम से भी जानी जाती है।

Medha Patkar Narmada Bachao Andolan

मेधा पाटकर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों पर शोध करने वाली विश्‍वस्‍तरीय संस्‍था की सदस्‍य और प्रतिनिधि रह चु‍की हैं।

मेधा पाटकर ((Medha Patkar) पर्यावरण सक्रियता के लिए मानी जाती हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। नर्मदा नदी महाराष्ट्रा, मध्या प्रदेश तथा गुजरात में से बहकर अरेबिअन सागर तक पहुँचती हैं। इस नदी पर काफ़ी सारे छोटे बांध है , सरदार सरोवर बांध को बनाने की अनुमती सरकार ने दी  जिसके चलते कई गाव आज भी तवाह है। बांध नही बनने से आदीवासियों का बहुत नुकसान हो रहा हैं। साथ ही साथ किसानों का भी नुकसान हो रहा हैं।। उन से उनकी रहने की जगह छीन लिया जा रहा हैं। आदीवासियों का विस्थापन हो रहा हैं और उस के लिये उन्हें पूरा मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा हैं, साथ ही उनके पूर्ण पुनर्वास से भी सरकार अपना मुँह मोड़ रही है। पाटकर उन लोगों में से एक हैं जो इस अन्याय से लड़ रही हैं।। अपना पूरा समय नर्मदा नदी घाटी पर लगाने के लिए उन्होनें अपनी पी.एच.डी की पढ़ाई तक छोड़ दी थी .

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मेधा पाटकर का राजनितिक सफ़र Medha Patkar Political Career:

मेधा पाटकर (Medha Patkar) का राजनितिक सफ़र कुछ खास नही रहा 13 जनवरी 2014 को उन्‍होंने आम आदमी पार्टी में सम्‍मिलित होने के घोषणा की। लोकसभा चुनाव 2014 में मेधा पाटकर उत्‍तर पूर्व मुंबई से आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप में चुनाव लड़ी थी।

Medha Patkar Achieve So Many Awards and Honours

1991: Right Livelihood Award
1992: Goldman Environment Award
1995: Green Ribbon Award for Best International Political Campaigner by BBC, England
1999: Human Rights Defender’s Award from Amnesty International, Germany
1999: M.A. Thomas National Human Rights Award from Vigil India Movement
1999: Person of The Year BBC
1999: Deena Nath Mangeshkar Award
1999: Kundal Lal Award for peace
1999: Mahatma Phule Award
2013: Bhima Bai Ambedkar Award
2014: Mother Teresa Awards for Social Justice.

Award Source: wikipedia

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