नवरात्र में सासाराम के इस माँ ताराचण्डी मंदिर में लगती है भक्तों...

नवरात्र में सासाराम के इस माँ ताराचण्डी मंदिर में लगती है भक्तों की भीड़ Maa Tara Chandi Temple Sasaram

718
0
SHARE
Maa Tara Chandi Temple Sasaram

माँ ताराचण्डी का इतिहास (Maa Tara Chandi Temple History in Hindi):-

Maa Tara Chandi Temple Sasaram बिहार राज्य के रोहतास जिले सासाराम में कैमूर पहाड़ी के गुफा में स्थित माँ ताराचण्डी देवी का मंदिर (Maa Tara Chandi Temple Sasaram) चंदन शहीद पहाड़ियों से लगभग 1 किमी दूर स्थित हैं। यहाँ चंडी देवी मंदिर के पास, एक चट्टान पर प्रताप धवल का एक शिलालेख भी है। हिंदू पूजा करने के लिए यहाँ बड़ी संख्या में आते हैं इसलिए यह एक सुंदर धार्मिक स्थल बन गया है।

माँ ताराचण्डी मंदिर (Maa Tara Chandi Temple) के चारों तरफ पहा़ड, झरने और जल स्त्रोतों के बीच स्थित ताराचंडी मंदिर का मनोरम वातावरण मन मोह लेता है. यह भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. अपनी मनोकामनाओं के पूरी होने की लालसा में दूर-दूर से यहां भक्त आते हैं.

माँ ताराचण्डी (Maa Tara Chandi Temple) के दर्शन के लिए नवरात्री में श्रद्धालुओ का ताँता लगा रहता हैं. कथायो ग्रंथो और प्राचीण मान्यताओ के अनुसार माता के तारा रूप की पूजा यहाँ होती हैं. वैसे तो यहां सालो भर भक्तो की आना लगा रहता है,, लेकिन नवरात्र मे यहा पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है.

नवरात्र में दूर-दराज से यहाँ भक्तो का आना होता हैं. कहा जाता है कि यहा आने वालो की हर मनोकामना माता रानी पूरी करती है. इसलिए लोग इसे मनोकामना सिद्धी देवी भी कहते हैं. माँ ताराचण्डी (Maa Tara Chandi Temple Sasaram) सासाराम नगर से 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस मंदिर के प्रति यहाँ के लोगो बहुत श्रद्धा और विश्वास हैं.

नवरात्र मे मां के आठवें रुप की पूजा होती है. अष्टमी को मां के दरबार मे दर्शन के लिए तांता लगा रहता  है. दूर-दराज से आए लोग मां के दरबार में मत्था टेकने के बाद मां से आशीर्वाद के साथा-साथ सुख समृद्धि की भी कामना करते  हैं.

माँ ताराचण्डी मंदिर और कथा (Maa Tara Chandi katha in Hindi):-

माँ ताराचंडी विन्ध्य पर्वत के कैमूर पर्वत श्रृंखला में स्थित है. भारत के अन्य पीठों में इसका स्थान प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में है. इस शक्तिपीठ के बारे में कहा गया है की किंवदंती सती के तीन नेत्रों में से श्री विष्णु के चक्र से खंडित होकर दायां नेत्र यहीं पर गिरा था, जिसे  तारा शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि महर्षि विश्‍वामित्र ने इस पीठ का नाम तारा रखा था. दरअसल, यहीं पर परशुराम ने सहस्त्रबाहु को पराजित कर मां तारा की उपासना की थी. मां ताराचंडी (Maa Tara Chandi) इस शक्तिपीठ में बालिका के रूप में प्रकट हुई थीं और यहीं पर चंड का वध कर चंडी कहलाई थीं.

Also Read: हरसू ब्रह्म के दर्शन करने से भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती

सासाराम का इतिहास और इसका नाम सासाराम क्यों पड़ा (Sasaram History in Hindi):-

बिहार राज्य के यह मंदिर रोहतास जिले के सासाराम शहर में है. सासाराम पहले करूश प्रदेश के नाम से जाना जाता था. यहां का राजा कार्तवीर्यपुत्र सहस्त्रबाहु था. करूश प्रदेश का क्षेत्र कर्मनाशा नदी से लेकर सोनभद्र नदी के बीच का विशाल भूखंड है. यह क्षेत्र मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं, नदियों और तराइयों से हरा-भरा है. इस मंदिर की एक खास विशेषता है इसका धार्मिक सद्भाव का संदेश. दरअसल, इस मंदिर से सटा एक मस्जिद है, जहां मुसलमान नमाज अदा करते हैं. हिंदू-मुस्लिम भक्तों के साथ पूजा-अर्चना करने के कारण यहां का धार्मिक सद्भाव देखते ही बनता है. इसके अलावा, गुरु तेगबहादुर से जु़डे होने के कारण भी इस मंदिर में सिख धर्म के लोग भी अरदास करने आते हैं. इस धाम पर वर्ष भर में तीन बार उत्सव मनाया जाता है. दोनों नवरात्रों के अलावा, गुरुपूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक पूरे एक माह का यहां विशाल मेला लगता है. साथ ही शोभा यात्रा भी निकाली जाती है. यही स्थान आज सहस्त्रबाहु की नगरी सासाराम के नाम से भी जाना जाता है.

भैरव-चंडीकेश्‍वर महादेव मंदिर (Bhairav Chandikeshwar Mahadev Mandir Sasaram):-

मां ताराचंडी मंदिर (Maa Tara Chandi Temple) के पास ही भैरव-चंडीकेश्‍वर महादेव मंदिर है, जिसे सोनवाग़ढ शिव मंदिर कहा जाता है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. इस मंदिर में सोमवार को काफी भी़ड लगती है. कहा जाता है कि जो भक्त सोमवार को इस मंदिर में दूध और अक्षत च़ढाते हैं, उन पर भगवान शिव की महिमा जल्द ही बरसती है. इस मंदिर में अन्य भगवान को भी प्रतिष्ठापित किया गया है, जिससे भक्तों को अन्य भगवान के दर्शन का भी सौभाग्य प्राप्त होता है. मंदिर के आसपास का उपवन और पहा़ड इस मंदिर की सुंदरता में जान फूंक देते हैं. पूरा मंदिर प्रांगण ही शोभायमान है.

मुंडेश्‍वरी माता का मंदिर (Maa Mundeshwari Temple Kaimur Bhabua):-

यहां से करीब 60 किलोमीटर पश्‍चिम में मुंडेश्‍वरी माता का मंदिर है, जो पहा़ड पर स्थित है. मुंड का वध करने के कारण माता का नाम मुंडेश्‍वरी प़डा. आप यहां आने के बाद इस मंदिर का दर्शन भी कर सकते हैं.

मां ताराचंडी मंदिर कैसे पहुंचें (How to reach Maa Tara Chandi Mandir Sasaram Bihar?):-

देश के प्रमुख शहरों से यहां आप सीधे ट्रेन से पहुंच सकते हैं. इसके अतिरिक्त आप राज्य बस परिवहन और प्राइवेट सेवा वाली बसों से भी यहां आ सकते हैं, इसके साथ ही आप अपने  निजी वाहनों से तो यहां आ सकते हैं. साथ ही शहर में ऑटो टैक्सी की भी व्यवस्था मिलेगी जिससे आप माँ के दरबार तक पहुच जायेंगे . सासाराम के नजदीक जिन शहरों में एयरपोर्ट है, वे हैं वाराणसी, पटना और गया. हवाई जहाज से आप इन शहरों में आकर महज तीन से पांच घंटों में ही मंदिर पहुंच सकते हैं.

Credit: chauthiduniya.com

अगर आपको हमारा Maa Tara Chandi Temple History in Hindi अच्छा लगा तो आप जरुर Facebook, Twitter पर लाइक एंड शेयर करे और News in Hindi के लिए में पढ़ते रहिये.

data-matched-content-rows-num="2" data-matched-content-columns-num="2" data-matched-content-ui-type="image_stacked">