* भारत की संजीवनी देवनदी माँ गँगा *

* भारत की संजीवनी देवनदी माँ गँगा *

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Ganga
Image source http://images.mapsofindia.com/my-india/2014/12/ganga.jpg

“हर -हर गंगे ” “जय माँ गंगे “
* भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है माँ गँगा
इसकी जलधारा अमृत है, संजीवनी है जल तरल
देवनदी गँगा

कैसे हुआ गंगा नदी का जन्म और क्यों हुआ History of Ganga River in Hindi

गँगा मात्र सरिता है ,यह प्रकृति से प्राप्त अमूल्य सम्पदा है । महानदी गँगा के रूप में प्राप्त प्राचीन विरासत है । इस विरासत को प्रदूषण से मुक्त रखना हम भारतियों का कर्तव्य है ।

तीर्थ स्थल गौमुख से निकलती ,फिर रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश ,हरिद्वार और फिर भारत के कई प्रेदेशों में गँगा की अविरल धारा बहती है ।
जय माँ गँगा ,गँगा के प्रति हम भारतीयों की आस्था एक माँ के रूप में है , एक माँ की तरह माँ गँगा भी अपने बच्चों के दुःख सन्ताप हरती है ।
बात श्रद्धा और विश्वास का है ।
गँगा को मोक्ष दायिनी भी कहा जाता है ,इस नदी में स्नान करके लोगों के पाप दूर होते है ।
यूँ ही नहीं गँगा के जल को अमृत कहा गया ।हमारा प्राचीन इतिहास कहता है कि गँगा स्वर्ग से अवतरित हुयी ,कहते हैं महा राजा के सगर के सत्तासी हज़ार पुत्रों को मोक्ष दिलाने के लिये भागीरथ ने घोर तपस्या की । तब महानदी गँगा अवतरित हुई, इसलिये गँगा का एक नाम भागीरथ भी है । यूँ तो गँगा को कई नामो से जाना जाता है ,जैसे देवनदी,सुरसरि ,जान्ह्वी इत्यादि

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कहते हैं ,जब गँगा स्वर्ग से अवतरित हुयी उस समय गँगा की धारा का वेग इतना प्रचण्ड और तेज था कि वह समस्त विश्व को बहा ले जाती ,गँगा के प्रचण्ड वेग को काबू में करने के लिए शिव ने गँगा को अपनी जटाओं में समाहित करते हुए धीरे-धीरे धरती पर भेजा । स्वर्ग से उतरी, शिव की जटाओं में वास और हिमालय पर्वत से असँख्य जड़ी -बूटियों के रसायनों के मिश्रण वाली नदी अपने आप में अतुलनीय है ।
गँगा नदी भारतदेश की संजीवनी है ।

अब विश्वस्तर पर भी गँगा की महत्ता को मन जा रहा है।
गँगा नदी के रूप में भारत देश को जो धरोहर मिली है,

क्यों पवित्र मानी गई है गंगा नदी why Ganga water is pure in Hindi

हम भारतीयों का फर्ज बनता है कि हम इस धरोहर को संभाल कर रखे इसमें गंदगी इत्यादि न फैलाएं ।
गँगा एक नदी रूप में हमें जीवन देती है, एक प्यासे की प्यास बुझती है , तन -और मन को शीतलता देती है ।आसपास की भूमि को उपजाऊ बनाती है इसका जल सिचाई के काम भी आता है ।

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गँगा के जल को इतना पवित्र माना गया है कि कोई हवन हो ,पूजा, कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो गँगा जल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता ।गँगा के जल को कामण्डल में भरकर घरों में रखने की भी परम्परा है ,यह जल किसी विशेष अवसर पर उपयोग में लाये जाते हैं ।गँगा जल की एक बूँद रोगी के रोग दूर करती है ,साथ ही साथ तन और मन को शीतलता प्रदान करती है ।
” हर-हर गंगे जय माँ गंगे “यह सिर्फ जयकारा नहीं महा मन्त्र है ।इस मन्त्र का जाप करने मात्र से भी दुखों से मुक्ति मिलती है ।

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