दिवाली (दीपावली) व्रत कथा और पूजा विधि, Diwali, Deepavali Vrat Katha Puja...

दिवाली (दीपावली) व्रत कथा और पूजा विधि, Diwali, Deepavali Vrat Katha Puja Vidhi Hindi

3332
0
SHARE
Diwali

Diwali, Deepavali Vrat Katha Puja Samagri Vidhi Hindi, Diwali Puja Kaise kare: इसबार दिवाली 19/10/2017 को पुरे देश में धूम धाम से मनाया जायेगा दिवाली को लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है।

दिवाली व्रत कथा और पूजा विधि Diwali, Deepavali Vrat Katha Puja Vidhi Hindi

दिवाली हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख त्यौहारो में से एक है। दिवाली आने से महीनो पहले अपने घरो और दुकानों की सफाई शुरू हो जाता है। ऐसा कहा जाता है जहाँ साफ सफाई रहती है वही पर माँ लक्ष्मी विराजमान होती है। दिवाली धनतेरस के दो दिन बाद यानि कार्तिक माह की अमावस्या के दिन पूरे देश में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता हैं। दिवाली (Diwali) को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। इस दिन शहर जगमग जगमग करता है।

रामचरितमानस में लिखा गया है की भगवान् रामचंद्र अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर कार्तिक मास के अमावस्या के दिन अयोध्या लौटे थे। अपने प्रभु रामचंद्र जी के अयोध्या लौटने के खुशी में नगर वासियों ने दीप जलाकर अपनी खुशियाँ मनायी थीं। इसी याद में आज तक दिवाली पर दीपक जलाए जाते हैं और कहते हैं कि इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य का राजतिलक भी हुआ था। अंधकार पर प्रकाश का जीत हुआ था इसके उपलक्ष में हम दिवाली मानते है।

आज के दिन लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती जी की विधि पूर्वक पूजा किया जाता है। दिवाली के दिन व्यापारी अपने बही खाते बदलते है तथा फ़ायदा और नुक्सान का ब्यौरा तैयार करते हैं। दिवाली पर जुआ खेलने की भी परम्परा हैं। आज के दिन लोग खूब जुआ खेलते है। और लोग जुआ खेलकर यह पता लगाते हैं कि उनका पूरा साल कैसा रहेगा।

दिवाली (दीपावली) पूजा कैसे करे Diwali, (Deepavali) Puja Kaise Kare

दिवाली (Diwali) पर माता लक्ष्मी गणेश और माँ सरस्वती की पूजा किया जाता है। भारत मे दिवाली परम्परम्पराओं के पर्व के रूप में मानते है। पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ दिवाली का पूजन विधि (Diwali Pujan Vidhi) पूर्वक किया जाता है। इस दिन लक्ष्मी गणेश और सरस्वती जी के मूर्ति या चित्र की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि सबसे पहले गणेश जी की पूजा किया जाता है इसके बाद ही सभी देवताओ की पूजा किया जाता है इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन भी किया जाता है। सरस्वती की पूजा का कारण यह है कि धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है इसलिए ज्ञान की पूजा के लिए माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।

Also Read: क्या है शक्ति पीठ की कथा और महत्व?

इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा के रूप में लोग चाँदी के सिक्के और नोटों की गड्डी भी रखते हैं। इस दिन माता को प्रसन करने के लिए अपने घरो में रंगोली सजाकर माँ लक्ष्मी को खुश किया जाता है।

इस दिन धन के देवता कुबेर, इन्द्र देव तथा सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाले भगवान् विष्णु की भी पूजा की जाती है। रंगोली रंग बिरंगे रंगों से सजाकर बनाई जाती है।

दिवाली (दीपावली) पूजा समग्री Diwali Pooja ki Samagri In Hindi

धूप बत्ती (अगरबत्ती), चंदन, कपूर, केसर, यज्ञोपवीत 5, कुंकु, चावल, अबीर, गुलाल, अभ्रक
हल्दी, सौभाग्य द्रव्य- मेहँदी, चूड़ी, काजल, पायजेब, बिछुड़ी आदि आभूषण, नाड़ा
रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे
धनिया खड़ा, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल
शहद (मधु), शकर, घृत (शुद्ध घी), दही, दूध, ऋतुफल, (गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े इत्यादि)
नैवेद्य या मिष्ठान्न (पेड़ा, मालपुए इत्यादि), इलायची (छोटी), लौंग, मौली, इत्र की शीशी

तुलसी दल, सिंहासन (चौकी, आसन), पंच पल्लव (बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते) औषधि (जटामॉसी, शिलाजीत आदि), लक्ष्मीजी का पाना (अथवा मूर्ति), गणेशजी की मूर्ति, सरस्वती का चित्र, चाँदी का सिक्का लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र,

गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र, जल कलश (ताँबे या मिट्टी का), सफेद कपड़ा (आधा मीटर) लाल कपड़ा (आधा मीटर), पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार) दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा)
श्रीफल (नारियल), धान्य (चावल, गेहूँ), लेखनी (कलम), बही-खाता, स्याही की दवात
तुला (तराजू). पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), एक नई थैली में हल्दी की गाँठ,
खड़ा धनिया व दूर्वा आदि खील-बताशे, अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

दिवाली (दीपावली) पूजा विधि Diwali, (Deepavali ) Puja Vidhi in Hindi

दिवाली (Diwali) के दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व हैं। सबसे पहले दो थाली में छः चौमुखे दीपक रखें।

छब्बीस छोटे आकार के दीपक भी दोनो थालों में सजा कर रख दे। इन सभी दीपको को बारी बारी से प्रज्जवलित करके जल, रोली, खील, चावल, गुड, अबीर, गुलाल, बताशे, धूप, आदि से पूजा करें और टीका लगावें।

दुकानदार और व्यापारी लोग दुकान की गद्दी पर गणेश लक्ष्मी की पूर्ति रखकर पूजा करें। इसके बाद घर आकर पूजन करें। सबसे पहले पुरूष पूजा करे उसके स्त्रियाँ पूजन करें। स्त्रियाँ चावलों का बायना निकालकर कर उस रूपये रखकर अपनी सास को भेट कराये और उनका चरण स्पर्श करके आशीवार्द प्राप्त करें।

पूजा समाप्त होने के बाद सभी दीपकों को घर में जगह-जगह पर रख दे। एक चौमुखा, छः छोटे दीपक गणेश लक्ष्मीजी के पास रख दें। चौमुखा दीपक का काजल सब बडे बुढे बच्चे अपनी आँखो में डालें।



दिवाली पूजन कैसे करें Diwali Pujan Kaise Kare

सबसे पहले सुबह उठाकर नित्यक्रिया करने के बाद स्नान करे उसके नया या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

अब निम्न संकल्प से दिनभर उपवास रहें-
मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-
सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं
गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं
इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।

संध्या के समय पुनः स्नान करें।

लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी में घर की साफ सफाई कर दे और दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मी जी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मी जी का छायाचित्र भी लगाया जा सकता है।)

भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयाँ बनाएं।
लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बाँधें।
इस पर गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।
फिर गणेश जी को तिलक कर पूजा करें।
अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें।
इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं।
फिर जल, मौली, चावल, फल, गुढ़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें।
पूजा पहले पुरुष तथा बाद में स्त्रियां करें।
पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें।

एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें-

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥

इस मंत्र से इंद्र का ध्यान करें-

ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः।
शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥

इस मंत्र से कुबेर का ध्यान करें-

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।
भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥

इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें। पूजा होने के बाद इच्छानुसार घर की बहू-बेटियों को आशीष और उपहार दें।



लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है। इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेशजी की मूर्ति रखें। समीप ही एक सौ एक रुपए, सवा सेर चावल, गुढ़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पाँच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें।

उन्हें लड्डुओं से भोग लगाएँ। दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आँखों में लगाएं। फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें। इस दिन घर में बिल्ली आए तो उसे भगाएँ नहीं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों की वंदना करें।

व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधि पूर्वक पूजा करें। रात को बारह बजे दिवाली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल्ल, लोढ़ा तथा छाज (सूप) पर कंकू से तिलक करें। (हालांकि आजकल घरों मे ये सभी चीजें मौजूद नहीं है लेकिन भारत के गाँवों में और छोटे कस्बों में आज भी इन सभी चीजों का विशेष महत्व है क्योंकि जीवन और भोजन का आधार ये ही हैं)

दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ। लक्ष्मी पूजन के बाद अपने घर के तुलसी के गमले में, पौधों के गमलों में घर के आसपास मौजूद पेड़ के पास दीपक रखें और अपने पड़ोसियों के घर भी दीपक रखकर आएं।

मंत्र-पुष्पांजलि :
( अपने हाथों में पुष्प लेकर निम्न मंत्रों को बोलें) :-

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्‌ ।
तेह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥
ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे ।
स मे कामान्‌ कामकामाय मह्यं कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु ॥
कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः, मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि ।
(हाथ में लिए फूल महालक्ष्मी पर चढ़ा दें।)

प्रदक्षिणा करें, साष्टांग प्रणाम करें, अब हाथ जोड़कर निम्न क्षमा प्रार्थना बोलें :-


क्षमा प्रार्थना :

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्‌ ॥
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्ण तदस्तु मे ॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वम्‌ मम देवदेव ।
पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः ।
त्राहि माम्‌ परमेशानि सर्वपापहरा भव ॥
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥

पूजन समर्पण :
हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र बोलें :-
‘ॐ अनेन यथाशक्ति अर्चनेन श्री महालक्ष्मीः प्रसीदतुः’
(जल छोड़ दें, प्रणाम करें)

विसर्जन :
अब हाथ में अक्षत लें (गणेश एवं महालक्ष्मी की प्रतिमा को छोड़कर अन्य सभी) प्रतिष्ठित देवताओं को अक्षत छोड़ते हुए निम्न मंत्र से विसर्जन कर्म करें :-

यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्‌ ।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च ॥
ॐ आनंद ! ॐ आनंद !! ॐ आनंद !!!

यह लेख brandbharat.com से प्रेरित हो कर लिखा गया जिसके सहयोग के लिए zuban सदा आभारी रहेगा, और आप लोगो को Diwali की ढेर सारी शुभकामनाये

ये भी खबर पढ़े

loading...