*अवसाद या डिप्रेशन * *Health is wealth*

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Depression Treatment in Hindi क्यों आज का युवा तनावग्रस्त है ?क्या उनके अन्दर क्षमता की कमी है ?
उत्तर. नहीं नहीं ये भी हम लोगों की तरह हैं। फिर क्या कारण है ?

डिप्रेशन (अवसाद) के लक्षण (Depression Symptoms in Hindi):

1.चार साल के बच्चे के कांधे पर स्कूल का बैग बोझे की तरह ना डालें।
2.परीक्षा के दौरान बच्चों पर आव्यशकता से अधिक दवाब ना बनाये ।
3.एक बार की हार को किसी के गले का हार न बनायें
4.उसे समझायें की हार जीत तो जीवन के दो पहलू हैं ।
गलतियों को सुनाते रहने की बजाय ,गलतियों को सुधारने के गुण सिखायें।
5. इतना दवाब ना बनाये कि, जीवन की दौड़ में भागते रहना है , चाहे कुछ भी हो ,चाहे तुम बीमार भी पड़ो पर रुकना नहीं हार गये तो लोग क्या कहेंगे ?
6.अजी लोगों के बारे में सोचना छोड़िये, वह लोग कभी आपकी मदद करने नही आयेंगे।

डिप्रेशन (अवसाद) बचने के 6 तरीक़े (Six Depression tips in Hindi):

  1. नींद को नियमित रखना
  2. अच्छा खाना और समय पर खाना
  3. तनाव तो सभी को होता है लेकिन ऐसा विचार रखना कि इसे कैसे कम रखना है
  4. महत्वाकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल करना संभव हो
  5. परिवार के साथ जुड़े रहना
  6. अपने कार्य में व्यस्त और मस्त रहना

आज के युग हम मनुष्यों का बस एक मक़सद है ,आगे बढ़ना तरक्की करना। बहुत अच्छी बात है आगे बढ़ना तरक्की करना क्योंकि आगे बढ़ना प्रकृति का नियम है।
परन्तु इस आगे बढ़ने की होड़ में हमने अपने बच्चों का भविष्य दाव पर लगा दिया है ।
आज के युग मे हम मनुष्यों ने बस एक ही लक्ष्य बना रखा है बस आगे बढ़ना ।
आप जानते हैं कि आज की युवा पीढी तनावग्रस्त क्यों है ?
गलती है हम माताओं पिताओं की ,हमने बच्चों पर आव्यशकता से अधिक प्रेशर डाल रखा है ,थोड़ा बहुत प्रेशर ,या दवाब डर जरूरी है। परन्तु हमे यह भी समझना होगा कि हर किसी की अपनी अलग विशेषता होती है ,क्यो हम किसी के जैसा अपने बच्चों को बनायें ,किसी के गुण ग्रहण करना गलत नहीं ,परन्तु कोई कहे तुम्हें महात्मा गाँधी बनना है ,तो वो हो नही सकता ,हाँ गाँधी जैसा कोई बन सकता है ।
जिसकी जितनी काबलियत होगी वो उतना ही करता है ।

*जब एक वृक्ष के फल भी एक जैसे नही होते कोई खट्ठे ,कोई मीठे** तो फिर मनुष्यों में विविधता हों कोई आश्चर्य नहीं* ।
*जो जैसा है, वो वैसा है ,किसी के जैसा नहीं* *किसी के अवगुण देखकर उसे सुन्दर आकर देना उत्तम है* ।
तन के साथ मन की स्वस्तथा भी महत्वपूर्ण है । मन की परिपक्वता अच्छे सन्कल्प लाती है जो असफलता के कारणों को ढूंढते हुए सफलता की सीढ़िया बना लेती हैं। कहते भी हैं ना *मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत* शरीर से भले ही कमजोर हों पर अगर हमारा मन यानि संकल्प शक्ति अच्छी है ,तो हमारा मन हमे जीत दिलायेगा।

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