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Chhath Puja Vidhi in Hindi 2017: छठ पूजा मुहूर्त का समय कथा और पूजा विधि

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Chhath Puja

Chhath Puja Vidhi in Hindi 2017, Chhath Puja kaise kare: कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की षष्ठी को मनाए जाने वाले इस त्यो्हार को छठ कहा जाता है। पूर्वी भारत में छठ पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। बिहार, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश में छठ महा पर्व पुरे हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। अब तो इस महा पर्व को भारत के हर कोने में मनाया जाने लगा है छठ पर्व एक साल में दो बार मनाया जाता है- पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में मनाया जाता है।

छठ पूजा 2017: मुहूर्त समय Chhath Puja 2017 ka Shubh Muhurat
छठ पूजा के दिन कब होगा सूर्यादय – 06:41 am
छठ पूजा के दिन कब होगा सूर्यास्त – 18:05 pm

ये है छठ पूजा की डेट Chhath Puja 2017 Date

षष्ठी तिथि प्रारंभ- 25 अक्टूबर को सुबह 09:37, 2017
षष्ठी तिथि समाप्ति- 26 अक्टूबर 2017 को शाम 12:15 बजे पर

छठ पूजा क्यों मनाते है Why We Celebrate Chhath Puja in Hindi ?

छठ पूजा इस लिए मनाया जाता की संतान की सुख और समृधि के मनाया जाया है। छठ पूजा में हम लोग सूर्य भगवान् को अर्घ और उपासना करते है। हिन्दू धर्म में हमेशा ही उगते हुए सूर्य को नमस्कार और पूजा किया जाता है, लेकिन छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमे हम डूबते हुए सूर्ये भगवान् का पूजा और अर्घ देते है।

छठ पर्व दिवाली पूजा के छठे दिन मनाया जाता है। सूर्य के छठे व्रत में रहने के कारण इसे छठ महापर्व कहा गया है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में यह त्‍योहार काफी लोकप्रिय पर्व है। इस त्‍योहार को यहां पर पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।

छठ पूजा महोत्सव का इतिहास और महत्व Chhath Puja History and Katha

सबसे पहले छठ महापर्व का जिक्र महाभारत में हुआ था। महाभारत कथा के अनुसार जब पांडव कौरव से जुए में अपना सारा राज-पाट हार गए थे तब पांडव के लिए द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था। इस व्रत के बाद दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुई थीं। तब से ही छठ पूजा करने की प्रथा चली आ रही है। छठ पर्व को चार दिन तक मानते है।

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छठ एक ऐसा पर्व जिसमे स्त्री और पुरुष दोनों एक साथ व्रत रख सकते है। छठ का व्रत रखना बहुत कठिन होता है इसमें चार दिन तक अन्न और जल ग्रहण नही करना होता है। छठ एक पवित्र पर्व है। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली पौराणिक और लोककथाओं के अनुसार यह पर्व सर्वाधिक शुद्धता और पवित्रता का पर्व है।



एक कथा और भी है कि जब राम चन्द्र जी लंका पर विजय प्राप्‍त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव को प्रशन्न किया था। इसके बाद सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

छठ पूजन की सामग्री । Chhath Pujan Samagri in Hindi

-बॉस या पितल की सूप
-बॉस के फट्टे से बने दौरा व डलिया
-पानी वाला नारियल
-गन्ना पत्तो के साथ
-नींबू बड़ा
-शहद की डिब्बी
-पान सुपारी
-कैराव
-सिंदूर
-सुथनी
-शकरकंदी
-डगरा
-हल्दी और अदरक का पौधा
-नाशपाती
-कपूर
-कुमकुम
-चावल अक्षत के लिए
-चन्दन
-उस समय मिलने वाला सभी फल को पूजा में सामिल किया जाता है।
-घर पर शुद्ध देसी घी में बना हुआ ठेकुवा जिसे हम लोग अग्रोटा भी कहते है, इत्यादि   छठ पूजन के सामग्री में शामिल है।

छठ पूजा व्रत की विधि : Chhath Puja Vidhi in Hindi, Chhath Puja Kaise Kare

छठ पूजा (Chhath Puja) चार दिवसीय महापर्व है। छठ पूजा कार्तिक माह के शुक्लपक्ष चतुर्थी को शुरू होता है और कार्तिक शुक्लपक्ष सप्तमी को समाप्ति होती है। इस दौरान व्रत रखने वाले स्त्री और पुरुष दोनों लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। व्रत में वे अन्न और जल का उपयोग नही करते है।

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छठ व्रत विधि Chhath Puja Vrat Vidhi in Hindi

खाए नहाय: छठ पूजा (Chhath Puja) करने से पहले अपने घर को साफ सुथरा कर ले, इस दिन नहाने खाने की विधि होती है। जिसमें व्यक्ति को स्वयं शुद्ध होना चाहिए तथा केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए।

खरना: इसके दूसरे दिन खरना की विधि होती है। इसके इसके लिए अपने रसोई घर खूब अच्छे से साफ कर ले और बर्तन भी साफ कर ले हो सके तो नये बर्तन का उपयोग करे। खरना में स्त्री हो या पुरुष जो व्रत रखना चाहता हो उसे पूरे दिन का उपवास रखना है और शाम के समय गुड़ या गन्ने का रस में बने हुए चावल की खीर को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। इस दिन बनी गुड़ की खीर बेहद स्वादिष्ठ होती है।



सूर्यास्त (शाम) का अर्घ्य: तीसरे दिन यानि षष्ठी को पूरे दिन का उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाट पर ले जाना चाहिए। शाम को सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसी ही रखना चाहिए। इस दिन रात के समय छठी माता के गीत गाने चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए।

सूर्योदय (सुबह) का अर्घ्य: इसके बाद घर लौटकर अगले (चौथे) दिन सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना चाहिए। उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान-रक्षा का वर मांगना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद वितरण करना चाहिए तथा स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत खोलना चाहिए।

छठ व्रत कथा Chhath Vrat Katha in Hindi

छठ व्रत कथा कुछ इसप्रकार है एक समय की बात है किसी नगर में एक प्रियव्रत नाम के एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम मालिनी था। परंतु दोनों की कोई संतान न थी। इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे। उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ के फल स्वरूप रानी गर्भवती हो गई।नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ। इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ। संतान शोक में वह आत्म हत्या का मन बना लिया। परंतु जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं।



देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं। मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं। इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं। यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी।” देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया।राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि -विधान से पूजा की। इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा।

छठ व्रत के संदर्भ में एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखने से उनकी इस व्रत के प्रभाव से उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया।