Bhai Dooj Katha Puja Vidhi in Hindi, भाई दूज कैसे मनाना चाहिए...

Bhai Dooj Katha Puja Vidhi in Hindi, भाई दूज कैसे मनाना चाहिए और पूजा विधि

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Bhai Dooj

Bhaiya, Bhai Dooj Katha, Story Puja Vidhi in Hindi: भाई दूज का मतलब क्या होता है और कैसे मनाया जाता है इसकी जानकारी हम आपको विस्तार से बताएँगे। सबसे पहले तो हम बता दे की भाई दूज कब मनाया जायेगा। भैया दूज का पर्व भारत के हर कोने में मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक भाई दूज (Bhai Dooj) का पर्व कार्तिक शुक्लपक्ष के द्वितीय तिथि यानि 21 अक्टूबर 2017 दिन शनिवार को विधि पूर्वक को मनाया जाएगा।

भाई दूज पूजा शुभ मुहूर्त Bhai Dooj Puja Muhurat

21 अक्टूबर 2017 दिन शनिवार को भाई दूज के दिन टिका या तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दिन में

भाई दूज टीका का शुभ मुहूर्त – 13:12 से 15:27 बजे तक (Bhai Dooj Tika Muhurat = 13:12 to 15:27)
द्वितीय तिथि प्रारम्भ – 01:37 बजे से यानि 21 अक्टूबर 2017 को
द्वितीय तिथि समाप्त = 03:00 बजे 22 अक्टूबर 2017

भाई दूज दिवाली और गोवर्धन पूजा के अगले दिन मनाया जाता है। इस त्योहार का अलग ही महत्व है। हिन्दू धर्म के कथा के अनुसार यह भाई और बहन का त्योहार होता है। बहन अपने भाई की लम्बी उम्र के लिए प्राथना करती है, जिसमें बहनें अपने भाईयों को टीका कर कलावा बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।

भाई दूज पूजा विधि Bhai Dooj Puja Vidhi in Hindi

भाई दूज कैसे मनाना चाहिए:-

  • भाई दूज के दिन बहन बहुत जी खुश रहती, बहनों की सुबह उठकर नहा-धोकर पूजा करनी चाहिए और व्रत रखने की विधि है।
  • बहन नये कपडे पहन कर पूजा की थाली सजाएं। इसमें मिश्री, रोली, सूखा नारियल (गोला), और चावल रखें। अगरबत्ती, धुप और घी का दिये जलाए।
  • इसके बाद आटे से एक चौक बनाएं और उस पर लकड़ी पीढ़े रखकर अपने भाई को बैठाये। बैठने के बाद उसको टिका लगाये और उसकी आरती उतारें।
  • हाथ में कलावा बांधें और आरती उतारें।
  • भाई की पूजा करते वक्त बहन को अपने मन में भाई के लम्बी उम्र के लिए प्राथना करना चाहिए और उसकी सुरक्षा की भी कामना करें।
  • आरती और पूजा होने के बाद भाई को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराये।
  • इसके बाद भाई के गोद में सूखा नारियल और प्राप्त करे।
  • इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार के रूप में पैसे या आभूषण आदि दे सकता है, या फिर उनकी पसंद का कोई उपहार दे सकते हैं।
    ये सब प्रक्रिया होने के सभी बहनें अपना व्रत खोल लें और जो भी खाना बनाया हो वो खा सकती है।
  • शाम होने के बाद घर के मुख्य द्वार पर चार मुख वाला दिया यमराज के नाम जलाएं और उनका ध्यान करें। इस दीए को दक्षिण दिशा की ओर रख दें।
    और इस तरह भाई और बहन का पवित्र पर्व को पूरे हर्षोल्लास के साथ मना सकती हैं।



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भाई दूज मंत्र Bhai Dooj Mantra

भ्रातुस तबा ग्रजाताहम् , भुंकसा भक्तमिदम् शुवम् प्रीतये यम राजस्य यमुनाह विशेषतः “
“मार्कण्डेय महाभाग सप्तकल्पांत जीवनः चिरंजीव यथा त्वम् ही तथा में भरतराम कुरु“

भाई दूज के त्योहार की मान्यता Bhai Dooj Kyu Manaya Jata Jai

भाई दूज त्योहार को लेकर कई कथाये भी प्रचलित हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन आसमान में उड़ती हुई चील दिखे तो उसे देख बहनें अपने भाईयों के लिए जो भी प्राथना और दुआ मांगती हैं वो पूरी होती है।

भाई दूज का एक रीती रिवाज है जी इस दिन अगर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर खाना खिलाए तो भाई की उम्र बढ़ती है। इस दिन भोजन कराने काफी महत्वपूर्ण माना गया है। अगर आपकी के अपनी बहन ना हो तो वो अपनी कजिन बहन को भोजन कराए और अगर वो भी ना हो या किसी वजह से संभव ना हो पाए तो गाय को भोजन कराए।

भैया दूज की व्रत कथा Bhai Dooj Vrat katha and Story in Hindi

भैया दूज की कथा बहुत लोक प्रिय और प्रेणादायक है। भैया दूज का पर्व भाई और बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक का त्योहार के रूप में मनाया जाता है। आइये भाई दूज की कथा के बारे में जानते है।

Katha विस्तार से:- भगवान सूर्य देव की पत्नी का नाम छाया था। दोने के कोख से एक पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ, पहले पुत्र का यमराज तथा दूसरी पुत्री का यमुना था। कथा के अनुसार बताया गया है की बहन यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्यार करती थी। यमुना चाहती थी की उनका भाई उनके घर आकर भोजन करे इसके लिए वो अपने भाई यमराज से बराबर निवेदन करती थी कि अपने मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। यमराज अपने कार्य में इतने व्यस्त रहते थे की अपनी बहन की बात बार बार टाल देते थे।

एक दिन ऐसा समय आया की यमुना ने अपने भाई यमराज को कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया तिथि को अपने घर भोजन करने के लिए निमंत्रण भेजा और यमराज को अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज अपनी बहन की बात को उस समय टाल नही पाए और बहन के घर जाने के लिए राजी जो गये। भाई तो घर आने के ख़ुशी में यमुना फुले नही समां रही थी।

यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस प्रेम से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खु का ठिकाना नहीं रहा।



यमुना तैयार होकर अपने भाई के स्वागत में लग गई। यमुना ने भाई को बड़े आदर से भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए अतिथि सत्कार से यमराज बहुत प्रसन्न हुए और अपने बहन से कहा के तुम कोई भी वरदान हमसे मांग सकती हो। यमुना ने कहा कि भैया आपसे मै यही वर मांग रही हु की आप प्रति वर्ष इसी दिन (कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया) मेरे घर आया करो। जो भी बहन अपने भाई को पुरे आदर और सत्कार से अपने भाई को भोजन कराये उसे कभी आपकी भय ना रहे। बहन की बात सुनकर यमराज ने तथास्तु कहा और यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक प्रस्थान हो गये।

उसी दिन से भाई दूज पर्व की परम्परा बन गई। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।
अतः हम लोगो का कर्त्तव्य है की इस पावन पर्व को विधिवत तरीके से मनाये।

Zuban टीम के तरफ से आप सबको भाई दूज की शुभकामनाये। इसी तहर भाई बहन का प्यार बना रहे है।

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धन्यवाद !!