अपने और परायों की आग में जल रहा है जम्मू-कश्मीर !!

अपने और परायों की आग में जल रहा है जम्मू-कश्मीर !!

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भारतीय सेना द्वारा बुरहान वानी को मारे जाने के बाद से घाटी अशांति के दौर से जूझ रहा है। पिछले तीन महीने से घाटी अपने ही लोगों के विरोध के साथ साथ पाकिस्तान की तरफ से लगातार किये जा रहे सीज फायर की आग में भी जल रहा है। घाटी जहां अपने ही बच्चों के पथराव को झेलता है तो वहीं दुश्मनों की गोलियों से लगातार अपने जवानों को खोता जा रहा है. घाटी को धरती का स्वर्ग कहा जाता है लेकिन वहां की हकीकत नरक से भी भयावह लगती है। दिल्ली में बैठी हमारी सरकार और मीडिया अपने फायदे के लिए काम करती है। मीडिया जहां घाटी के हालातों से टीआरपी का खेल, खेल रही है वहीं हमारे हुक्ममरान घाटी की आड़ में राजनैतिक रोटियां सेक रहे है। सरकार और मीडिया ये बता कर खुश हो जाती है कि हमारी सेना ने पाकिस्तान को मुंह-तोड़ जवाब दिया।

सीना चौड़ा करके ये बताया जाता है कि भारत ने पाकिस्तान से बदला ले लिया। लेकिन इन सब के बीच कई सवाल उठते है। पहला घाटी में शांति बहाल करने का स्थाई इलाज क्या है?  दूसरा सवाल क्या सैनिकों ऐसे ही शहीद होते रहेंगे ?  तीसरा सवाल शहीद सैनिकों के परिजनों के दुख की कीमत क्या मुआवजा है ?  घाटी की जनता चैन से कब सोएगी?  वहां के बच्चों को कब बेहतर भविष्य़ मिलेंगा ?  उनके हाथ में पत्थर की जगह कलम कब होगी?

देश विरोधी नारों की जगह देश हित के नारे कब लगेंगे?  ऐसे ही हज़ारों सवालों के जवाब घाटी ढ़ूढ रहा है। लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं है, और जिनसे जवाब की उम्मीद है वो रोटियां सेकने में मशगूल है। इंतराज है शायद इस बार सरकार घाटी के लिए कुछ करें। उम्मीद है एक दिन वहां भी लोग बेखौफ घर से बाहर निकलेंगे। सरकार के साथ-साथ वहां के लोगों को भी आगे आना होगा। और अपने लिए क्या सही है और क्या गलत ये पहचानना होगा क्योंकि पड़ोसी तो आंख गढ़ाए बैठे ही है। उम्मीद तो बस ये है कि अंधेरी रात के बाद जैसे उजाला भरी सुबह होती है ठीक वैसे ही घाटी में भी एक दिन अमन की सुबह होगी।

Edited By: Sandarshika , Delhi

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