अनंत चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि, Anant Chaturdashi Vrat Katha and...

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि, Anant Chaturdashi Vrat Katha and Puja Vidhi in Hindi

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Anant Chaturdashi Vrat Katha

Anant Chaturdashi Vrat Katha and Puja Vidhi in Hindi: हिंदी महीने के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) मनाई जाती है। इस वर्ष मंगलवार  5 सितंबर 2017 को अनंत चतुर्दशी का मनाई जाएगी। इसी दिन भगवान् गणपति का विसर्जन भी किया जाता है। देश भर में आज के दिन अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाई जाती है।

अनंत चतुर्दशी की कथा Anant Chaturdashi Katha in Hindi:-

अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) को अनंत यानि विष्णु भगवान् की पूजा किया जाता है, कहा जाता है की अनंत देव की पूजा करने से सारे संकट दूर हो जाते है। पूजा करते समय अनन्तसूत्र अर्थात अनंत धागा बांधा जाता है। कहा जाता है ये धागा को बांधने से सारी परेशानिया दूर हो जाती है मन को शांति मिलती है।

अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा और पूजा विधि (Anant Chaturdashi Vrat Katha in Hindi)

पौराणिक काल में एक ब्यक्ति रहता था जिसका नाम सुमन्त था जो की ब्राह्मण जाती से था। सुमन्त  के पत्नी का नाम दीक्षा था, एक दिन उसके घर एक बेटी पैदा हुई। बेटी के पैदा होते ही ब्राह्मण  की पत्नी का स्वर्गवास  हो गया। पत्नी के अचानक मर जाने से ब्राह्मण  बहुत दुखी रहता था । बच्ची को पालने के लिये ब्राह्मण ने अपनी दूसरी शादी कर्कशा से किया, लेकिन ब्राह्मण की दूसरी पत्नी उसकी बेटी सुशीला को बिलकुल भी पसंद नहीं करती थी। जब सुशीला विवाह करने लायक हो गई तो ब्राह्मण  ने उसके विवाह का प्रस्ताव कौंडिल्य ऋषी के पास रखा, जिसे मान कर कौंडिल्य ऋषि ने सुशीला से शादी कर ली। शादी में भी ब्राह्मण की दूसरी पत्नी ने कोई सहयोग नहीं दिया और ब्राह्मण ने अपनी संस्कारी बच्ची की विदाई में सिर्फ आटे का हलवा ही दे पाया।



जब कौंडिल्य ऋषि सुशीला को लेकर उसी आश्रम में रहने लगे सुशीला की माता का व्यहार अच्छा नही था, जिसके चलते दोनों को घर से निकलना पड़ा । दोनों घर के लिए भटक रहे थे तभी रास्ते में एक नदी के किनारे कुछ लोग अनंत भगवान की पूजा कर रहे थे। यह देखकर सुशीला ने अनंत व्रत कथा (Anant Chaturdashi Vrat Katha) के महत्व के बारे में पूछा । सुशीला ने पूरा विधान सुनकर उसका पालन किया और विधि पूर्वक अनंत भगवान की पूजा किया  ऐसा करने से कुछ ही दिन में उसके घर में धन, संपदा और सब कुछ आ गया। उनका जीवन स्जंती पूर्वक बीतने लगा।

एक दिन ऋषि कौंडिल्य ने सुशीला के हाथ पर अनंत पूजा का धागा बंधा देखा और उसके बारे में पूछा। सुशीला ने कहा कि ये अनंत चतुर्थी पर पूजा के बाद बांधा गया था और इसी वजह से हमारे घर में सब कुछ अच्छा हुआ है। इस बात पर ऋषि कौंडिल्य भड़क गए और कहा कि ये इससे नहीं मेरी मेहनत से हो रहा है। ऐसा कह कर उन्होनें सुशीला के हाथ से धागा तोड़कर आग में फेंक दिया। धागा टूटने के साथ ही उनका बुरा वक्त शुरू हो गया और सब कुछ खत्म हो गया। घर के हालात दिन ब दिन खराब होते गए।

ऋषि कौण्डिन्य अनंत भगवान (Anant Bhagwan Chaturdashi) की खोज में घर से निकल गए। रास्ते में वो आम के पेड़, गाय, बैल, गधा मिला, उन्होने उनसे भी भगवान अनंत के बारे में पूछा, लेकिन कहीं कोई जवाब नहीं मिला । जब वे थक कर गिर गये तब भगवान को उन पर दया आई और ऋषि कौण्डिन्य को महालक्ष्मी के साथ दर्शन दिए और बताया की मै ही अनंत हूँ। ऋषि ने उनसे माफी मांगी और कहा  की मुझसे भूल हो गई । कौण्डिन्य घर आये और अपनी पत्नी सुशीला के साथ मिलकर अनंत चतुर्दशी को पूजा (Anant Chaturdashi Puja) की उसके प्रभाव से वो धन-वैभव संपन  हुए।

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अनंत चतुर्दशी और व्रत विधी Anant Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi:-

-सुबह उठें और नहा धोकर स्वच्छ कर लें
– पूजा स्थल पर कलश को अच्छे से धोने के बाद चमकाकर रखें
-कलश में कमल का फूल रखें
– कुषा का धागा या सूत्र चढ़ाएं
– कलश पर कुमकुम और हल्दी का रंग लगाएं
-हल्दी से ही कुषा के रंगें
-अनंत देवता का ध्यान करके धूप, अगरबत्ती लगाएं
-पूजा के बाद ये धागा बांध लें
-इस दिन खाने में पूरी खीर बनाएं

अनंत सूत्र बांधने का मंत्र इस तरह है Anant Chaturdashi Sutra Mantra

“अनंत संसार महासमुद्रे
मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व
ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते।। “